स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के ऐक्शन से तिलमिलाया चीन, तिब्बती जवानों पर जमकर निकाली भड़ास

 लद्दाख में स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) से मात खा चुका चीन तिलमिला गया है। 29-30 की दरम्यानी रात पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर ऊंचाई वाले इलाकों को कब्जाने की जंग में हार का सामना करने के बाद चीन ने तिब्बती सैनिकों वाले फ्रंटियर फोर्स पर जमकर भड़ास निकाली है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय जांबाजों के लिए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, उससे पता चलता है कि SFF का मिशन बेहद सफल रहा है और चीन उनके दिए दर्द से बेचैन हो उठा है।

चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत और चीन के बीच मौजूदा सीमा टकराव ने भारतीय बल के एक यूनिट को स्पॉटलाइट में ला दिया है, जिसमें निर्वासित तिब्बती शामिल किए जाते हैं। भारतीय मीडिया के मुताबिक यह एक उत्कृष्ट यूनिट है और भारत के उकसावेपूर्ण कार्रवाई में इसने अहम भूमिका अदा की है। 




कथित चाइनीज विश्लेषकों के हवाले से अखबार लिखता है कि स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) में करीब 1000 सैनिक ही हैं। यह उत्कृष्टता से दूर है और भारतीय सेना इनका इस्तेमाल केवल युद्धबलि के रूप में किया। दुनियाभर के अखबारों में SFF की वीरता को लेकर हो रही चर्चा पर खींझ निकालते हुए ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पश्चिमी मीडिया ने SFF के बारे में कहा है कि निर्वासित तिबत्ती भारतीय सीमा में शामिल होकर चीन से लड़ने में भारत की मदद कर रहे हैं।  

सिंघुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रैटिजी इंस्टीट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कियान फेंग के हवाले से लिखा गया है कि SFF का गठन अमेरिका के सहयोग से 1960 के दशक में किया गया। निर्वासित तिब्बतियों के ऊंचे इलाकों में लड़ने की क्षमता को देखते हुए उन्हें सामिल किया गया। इनका इस्तेमाल भारतीय सेना ने चीनी सेना की जासूसी के लिए किया।  


कियान ने कहा SFF का महत्व भारतीय सेना में काफी घट गया है। इनकी संख्या भी हजार के आसपास ही है। अपने ही लोगों को संदेह की नजर से देखने वाले चीन ने कहा कि भारतीय सेना विदेशी सैनिकों पर विश्वास नहीं करती है। तिब्बतियों का सेना में दर्जा काफी नीचे है। वे केवल जीविकोपार्जन के लिए इस यूनिट में शामिल होते हैं। रॉयटर्स सहित कुछ विदेशी मीडिया ने SFF की तारीफ करते हुए दावा किया है कि निर्वासित तिब्बती सरकार चीन के खिलाफ जंग में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समर्थन दे रही है। 

ग्लोबल टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाले से कहा कि तिब्बत की निर्वासित सरकार अंधकार में खो चुकी है अंतरराष्ट्रीय रूप से कोई लहर नहीं पैदा कर सकती है। भारत-चीन सीमा तनाव का इस्तेमाल करके वह कुछ ध्यान खींचने की कोशिश कर रही है। चीन ने अपनी आर्थिक शक्ति और सैन्य क्षमता को भारत के मुकाबले बहुत अधिक बताते हुए कहा कि निर्वासित तिब्बितयों से सांठगांठ और तिब्बत कार्ड खेलकर भारत अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है।

गौरतलब है कि 29-30 की दरम्यानी रात को जब चीनी सैनिकों ने पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे पर घुसपैठ की कोशिश की तो वहां पहले से तैनात भारतीय जवानों ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया। साथ ही यहां के ऊंचाई वाले इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, इस मिशन को स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने अंजाम दिया। इस स्पेशल और सीक्रेट फोर्स की क्षमता और उपलब्धियों की हर तरफ चर्चा हो रही है और चीन इसे हजम नहीं कर पा रहा है।

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